राजनी को अनुपमा की खुली चेतावनी, परी और इशानी पर मंडराया खतरा
एपिसोड की शुरुआत में अनुपमा भगवान के सामने दीपक जलाकर प्रार्थना करती है। तभी प्रीत खुशी-खुशी उसे बताती है कि आज हुए विरोध प्रदर्शन के बाद कई महिलाएं उनके साथ आकर खड़ी हो गई हैं। अब पहले से ज्यादा महिलाएं राजनी के खिलाफ आवाज़ उठाने लगी हैं।
हालांकि यह खबर अच्छी होती है, लेकिन अनुपमा के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई देती है। वह सोचती है कि उनका एक दिन पहले ही निकल चुका है और लक्ष्य पूरा करने के लिए अब केवल दो दिन बाकी हैं। इसके साथ ही उसे लगातार परी और इशानी की चिंता भी सता रही होती है।
प्रीत उसे समझाती है कि मुंबई एक सुरक्षित शहर है और घबराने की कोई बात नहीं है। लेकिन अनुपमा कहती है कि अगर सब ठीक होता, तो अब तक परी और इशानी का फोन जरूर आ जाता। तभी अचानक उसके सामने रखा दीपक बुझ जाता है, जिससे उसका मन और भी अशुभ आशंकाओं से भर जाता है।
दूसरी ओर, वसुंधरा पराग को याद दिलाती है कि फैसला लेने के लिए उसके पास सिर्फ दो दिन बचे हैं। ख्याति उसे हिम्मत देते हुए कहती है कि वह जरूर कोई न कोई रास्ता निकाल लेगा। प्रेम भी पराग का साथ देता है। अपने बच्चों का यह समर्थन देखकर पराग भावुक हो जाता है और कहता है कि माता-पिता के लिए इससे बड़ी खुशी कोई नहीं होती जब उनके बच्चे मुश्किल समय में उनके साथ खड़े रहें। इसके बाद प्रेम और पराग एक-दूसरे को गले लगा लेते हैं।
इधर परी और इशानी जल्दी घर पहुंचने के लिए शॉर्टकट रास्ता चुनती हैं। परी को वह रास्ता ठीक नहीं लगता, लेकिन दोनों आगे बढ़ जाती हैं। तभी कुछ बदमाश उनका पीछा करने लगते हैं। डर के मारे दोनों लड़कियां अपनी जान बचाकर भागती हैं और मदद के लिए अनुपमा को पुकारती हैं।
उधर राही पराग की चिंता में टूट जाती है। प्रेम उसे संभालते हुए कहता है कि अगर वह खुलकर अनुपमा का साथ नहीं दे सकती, तो कम से कम दिल से उसका समर्थन करे। वह राही को याद दिलाता है कि अंदर से वह भी जानती है कि उसकी मां गलत नहीं है। फिर भी राही उलझन में रहती है।
भागते-भागते आखिरकार परी और इशानी अनुपमा के पास पहुंच जाती हैं। घबराई हुई दोनों लड़कियां बताती हैं कि राजनी के गुंडों ने उनका रास्ता रोक लिया था और धमकी दी कि अगर वे राजनी के खिलाफ खड़ी रहीं, तो अगली बार अंजाम और भी बुरा होगा।
यह सुनते ही अनुपमा का गुस्सा फूट पड़ता है। वह कहती है कि मासूम लड़कियों को डराने-धमकाने के लिए गुंडे भेजकर राजनी ने सारी हदें पार कर दी हैं।
वहीं दूसरी तरफ राजनी, वरुण को नई चमचमाती कार तोहफे में देती है और भारती को एक म्यूजिक स्टूडियो गिफ्ट करती है। वह भारती से कहती है कि भले ही उसने प्रेरणा को खो दिया हो, लेकिन वह हमेशा उसके साथ खड़ी रहेगी।
इसी बीच अनुपमा सीधे राजनी के सामने पहुंच जाती है। वह बिना किसी डर के उस पर परी और इशानी के पीछे गुंडे भेजने का आरोप लगाती है। राजनी तुरंत इन आरोपों को झूठा बता देती है।
अनुपमा उससे सवाल करती है कि आखिर एक महिला होकर वह इतनी नीचे कैसे गिर सकती है कि छोटी लड़कियों को धमकाए। वह पूछती है कि क्या उसने कभी अकेले सड़क पर चलते समय, बस में सफर करते हुए या किसी सुनसान जगह पर डर महसूस नहीं किया?
तभी वरुण बीच में आकर कहता है कि बिना सबूत के राजनी पर आरोप नहीं लगाए जा सकते। इस पर अनुपमा उसे बीच में न बोलने की चेतावनी देती है। वह राजनी से साफ शब्दों में कहती है कि अगर उसके परिवार के किसी भी सदस्य को कोई नुकसान पहुंचा, तो वह उसे कभी माफ नहीं करेगी। अब तक उसने सम्मान और मर्यादा के साथ लड़ाई लड़ी है, लेकिन अगर राजनी इसी तरह सीमाएं पार करती रही, तो वह भी पीछे नहीं हटेगी। अनुपमा की यह कड़ी चेतावनी सुनकर राजनी भी कुछ पल के लिए सहम जाती है।
बाद में परितोष और पाखी, परी और इशानी को अपने साथ घर चलने के लिए कहते हैं। उनका मानना है कि अनुपमा के साथ रहना अब सुरक्षित नहीं है। लेकिन दोनों लड़कियां साफ इनकार कर देती हैं।
अनुपमा भी उन्हें घर लौटने के लिए समझाती है, फिर भी वे उसकी बात नहीं मानतीं। पाखी ताना मारते हुए कहती है कि आज तो अनुपमा समझदारी की बात कर रही है, इसलिए लड़कियों को तुरंत उसके साथ से निकल जाना चाहिए। परितोष भी पाखी की बात का समर्थन करता है, लेकिन परी और इशानी साफ कह देती हैं कि वे किसी भी हालत में अनुपमा को अकेला छोड़कर नहीं जाएंगी।
हालांकि पाखी और परितोष की चिंता अभी भी बनी रहती है, लेकिन हसमुख उन्हें भरोसा दिलाते हैं कि अनुपमा सब कुछ संभाल लेगी।
आखिर में अनुपमा दोनों लड़कियों को गले लगाकर उनका हौसला बढ़ाती है। कुछ देर बाद प्रेरणा उससे पूछती है कि वह कहां गई थी। इस पर अनुपमा जवाब देती है कि जब बात अपने बच्चों की सुरक्षा की हो, तो एक मां किसी भी हद तक जा सकती है। वह बताती है कि वह राजनी को आखिरी चेतावनी देने गई थी।